बच्चो की परवरिश

अपने बच्चों को सिखाना है:

1. घर में ही तीन पीढियाँ रहें तो वह उत्तम घर है, चार पीढियाँ हुई तो अतिश्रेष्ठ है।

2. परिवार का विस्तार (&)60॥आ०7) हो, विभाजन (?कणा) नहीं।

3. दादाजी का अनुसरण पोता भी करे। ऐसे काम कौन से हैं, ये सोचना।

4. घर के बच्चे विद्यालय नियमित जाएँ। उनकी शिक्षा की योग्य व्यवस्था हो।

5. अपने कल की उत्तम बातें, अपने पूर्वजों की साधनाएँ और उनकी अच्छी आदतें निरंतर सिखाते रहना।

6. बच्चों को पड़ोसी बच्चों के साथ खेलने के लिए प्रोत्साहित करना।

7. बच्चों को दूसरों को सहयोग देना भी सिखाना चाहिए।

8. अपने बन्धु मित्रों के घर के कार्यक्रमों में बच्चों को ले जाना, लौटकर वहाँ के कार्यक्रम का क्रम, विशेषताओं का वर्णन करने को कहना।

9. अपने गाँव या मूल स्थान की विशेषताओं का वर्णन करना, बच्चों को बताना।

10. जल संरक्षण और जल सदुषपयोग सिखाना।

11. अच्छी चित्र कथा, पुस्तकें का लाकर बच्चों को देना, पढ़ने की प्रेरणा देना।

12. घर के सभी काम करने और कुशलतापूर्वक करने का सामर्थ्य सब में आए।

13. बच्चों को तिथि, वार, नक्षत्र, मास और वर्ष का नाम कण्ठस्थ करवाना।

14. बच्चों को संस्कारक्षम श्लोकों को कण्ठस्थ करवाना।

15. हर दिन बच्चों को अच्छी कहानियाँ सुनाना। इससे ज्ञान के साथ संबंध बढ़ता है।

16. बच्चों का स्वाभिमान बढ़े, प्रेरणा मिले ऐसे नाम रखना।

17. स्नान के बाद मस्तक पर तिलक लगाना।