आरोग्य

आरोग्य

1. घर में शौचालय और स्नान गृह अलग रहें तो अच्छा।

2. मुँह हाथ पैर धोकर ही भोजन खाना है।

3. हर निवाले को धीरे चबाकर ही खाना।

4. भोजन या अल्पाहार के बाद उपयोग किये पात्रों को तुरन्त धोका रखना। बिना धोए फिर से उपयोग नहीं करना।

5. घर में उपयोग होने के बाद जल निकास की योग्य व्यवस्था रहे।

6. शाम को बच्चों का खेलना अनिवार्य रहे। बच्चे अनेक रीति के खेल खेलें, खूब दौड़ भाग हो। तब ही शरीर के सभी भाग क्रियाशील रहेंगे।

7. उंगलियों के नखों को नहीं चबाना।

8. हर दिन कम से कम तीस मिनट व्यायाम करना।

9. मंदगति श्वासोच्छवास करना।

10. प्रातः बेड टी का अभ्यास ठीक नहीं होता है। आरोग्य के लिये अत्यन्त हानिकारक है।

11. खड़े-खड़े रसोई बनाना शरीर के लिये हानिकारक है। कमर दर्द, सायटिका, सन्धिवात इत्यादि रोग होते हैं।

12. जमीन पर सुखासन में बैठकर खाना अत्युत्तम आरोग्यदायक है। खड़े-खड़े खाना भी ठीक नहीं है।

13. घर में किसी के बीमार होने पर घबराएँ नहीं। प्रारंभिक चिकित्सा घर में सावधानी से करें। फिर चिकित्सक के पास ले जाएँ।

14 . रुग्णों की सेवा, सुश्रुधा, पथ्यपालन इत्यादि प्रेम से करने का सभी को अभ्यास हो।

15. हर नौजवान को वर्ष में एक दो बार रक्तदान करना चाहिये।

16. मृत्यु के बाद नेत्रदान करने के बारे में सब जागृत रहें।

17. मृत्यु अनिवार्य है। इसको समझकर किसी को भी मत्य के बारे में नहीं डरना चाहिए।

18. शौचालय अपने देश के तरीके का रहे। कमोड बुजुर्गों एवं रोगियों के लिए ठीक रहेगा रहेगा। कमोड आरोग्यशाली युवकों के लिये नहीं है।

19. चीनी के स्थान पर गुड़ खाना अच्छा रहता है।

20. सफेद नमक नहीं खाना, खड़ा नमक या सेंधा लवण का उपयोग करना।

21. तेल नहीं खाना। घी खाना।

22. लाल-मिर्ची के स्थान पर काली मिर्च खाना अच्छा।

23. बाहर से घर वापस आने पर तुरंत हाथ पाँव धोना।