स्वयंसेवक
स्वयंसेवक यानी स्वयं की प्रेरणा से नि:स्वार्थ बुद्धि से देश व समाज की सेवा करने वाला |
सामान्यतः संघ द्वारा एक स्वयंसेवक के अंदर निम्न गुणों की अपेक्षा की जाती है जिसका अभ्यास व् विकास संघ के शाखा में नित-प्रतिदिन कार्यक्रम के माध्यम से किया जाता है, यद्पि स्वयंसेवक के अंदर इस गुणों का विकास उसके स्वयं के इच्छाशक्ति पर भी निर्भर करता है
स्वयंसेवक के गुण
- अक्षय ध्येयनिष्ठा
- निरंतर साधना
- चरित्रवान
- अनुशासित
- अहंकार शून्य
- संघानुकूल जीवन
- व्यवहार कुशल
- आत्म – विश्वास
- तत्व व् व्यवहार में एकरूपता
- लोक-संग्रही
स्वयंसेवक होने से बढ़कर गर्व और सम्मान की दूसरी बात हमारे लिए कोई नहीं है। जब हम कहते हैं कि मैं एक साधारण स्वयंसेवक हूं, तब इस दायित्व का बोध हमें अपने हदय में रखना चाहिए कि यह दायित्व बहुत बड़ा है। समाज भी हमारी ओर देख रहा है और समाज हमें एक स्वयंसेवक के रूप में देखता है। समाज की हमसे बड़ी बड़ी अपेक्षाएं रहें और उन अपेक्षाओं को पूर्ण करते हुए हम उनसे भी अधिक अच्छे प्रमाणित हों।